HomeFashion3D printer क्या है | कैसे इस्तेमाल करते हैं, और इसका उपयोग...

3D printer क्या है | कैसे इस्तेमाल करते हैं, और इसका उपयोग कहाँ किया जाता है.

3D Printer क्या है 

दोस्तों वर्तमान में सूचना प्रौद्योगिकी के काल में 3D printer के विविध इलाक़ों में बढ़ते उपयोग ने इसे वार्ता का विषय बना दिया गया है। हालाँकि दोस्तों, अभी यह टेक्नोलॉजी उद्विकास के चरम स्तर पर है और सर्वसुलभ नहीं है लेकिन दोस्तों टेक्नोलॉजी रूप से बड़े देशों ने इसे हाथों-हाथ ले लिया गया है और वो घरेलू मशीनों के बनाने से लेकर अंतरिक्ष के इलाके तक इसका व्यापक प्रॉफिट उठाने का प्रयास भी कर रहे हैं। आज दोस्तों 3D printing technology का उपयोग अलग अलग इलाक़ों  में ज्यादातर सुरक्षा और एयरोस्पेस के क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़े मशीनों के अलग अलग भागों की मरम्मत करने तथा उपकरण संबंधी विविध घटकों को बनाने के लिये किया जा रहा है।

3d printer
3d printer

इस आलेख में 3D printer technology को समझने के साथ उनके अनुप्रयोग, संबंधित विश्व परिदृश्य, भारत में इनकी संभावनाएँ, इससे जुड़ी बहुत चुनौतियाँ तथा इन चुनौतियों के समाधान की कोशिश की जाएगी।

1. 3D Printer प्रिंटर क्या है. 

दोस्तों 3D Printer प्रिंटर या जिसे हम लोग 3Dimensional Printer भी कहते है, ये एक ऐसा प्रिंटर printer है, जो किसी भी वस्तु ( Object ) को बिल्कुल उसी जैसा प्रिंट ( Print ) करने की क्षमता रखता है।

Printer प्रिंटर क्या होता है ये तो आप सब जानते ही होंगे, लेकिन दोस्तों क्या आप ये जानते हैं की 3D Printer क्या हैं और ये किस तरीके से काम कराता है ? यदि आप भी अन्य लोगों के तरह इसके विषय में कुछ भी नहीं जानते हैं और आप अधिक जानना चाहते हैं तो आपको यह article पूरा जरूर पढना चाहिए.

दोस्तों जहाँ एक normal साधारण printer केवल 2d में ही print करने की क्षमता रखता है वहीँ दोस्तों 3D Printer इससे अधिक advanced होता है और ये 3d printer एक real object के तरह हर चीज  को three dimensional print करने की क्षमता रखता है. इससे आप जैसा imagine करेंगे वैसे वस्तु को design भी कर सकते हैं. ये सरलता और सुलभता 3d printer आपको मुहया करवाता है.

दोस्तों यदि आपको 2D या 3D के बारे में पता ही नहीं है तो ये होते हैं 2d dimensional और 3d dimensional. मतलब की किसी भी वस्तु को अगर एक बराबर जगह में रखा दिया जाये तो इसकी स्तिथि को x axis, y axis एवं z axis में भी देखा जा सकता है. और इससे उस object की गहराई को भी देख सकते हैं, 3d object पूरी तरह से real objects की ही तरह दिखने वाली होती है.

जहाँ हम दोस्तों 2d models की बात करें तो आप केवल सामने ही देख सकते हैं वहीँ दोस्तों 3d models के आगे पीछे चारों तरफ से देखा जा सकता हैं. जैसे की हम objects वास्तु को अपनी real life में देखते हैं.

2. 3D Printing प्रिंटिंग और भारत में सम्भावना 

दोस्तों हमारे देश भारत में विनिर्माण क्षमता को बढावा देने के उद्देश्य से देश के अन्य मुख्य विनिर्माताओं ने विदेशी टेक्नोलॉजी फर्मों के साथ मिलकर 3D printing प्रिंटिंग असेंबली लाइन और बंटवारा केंद्रों की स्थापना भी की है।

Price Waterhouse Coopers की ‘द ग्लोबल इंडस्ट्री 4.0’ शीर्षक से दी गयी एक रिपोर्ट में इस बात का बताया गया था कि साल 2016 के दौरान योगात्मक विनिर्माण टेक्नोलॉजी में लगभग 28 प्रतिशत उद्योगों ने निवेश भी किया है जो इस बात का संकेत देता है कि इंडिया के औद्योगिक इलाक़ों में 3D printing के व्यापक उपयोग की संभावना मानी जाती है।

दोस्तों हाल में भारत सबसे तेज गति से विकास करने वाला देश है जहाँ निवेश के अवसरों को बढ़ाने और देश की विनिर्माण क्षमताओं को पावर फूल प्रदान करने के मकसद से ‘‘डिजिटल इंडिया’ मेक इन इंडिया’, और ‘स्किल इंडिया’ जैसी पहलें शुरू की गई हैं जिसमें 3D printing बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

दोस्तों इसका प्रयोग छोटे शहरों में औद्योगिक विकास को अधिक बढ़ावा देने की दिशा में जरूरी होगा और पारंपरिक और मीडियम उद्यमों के इलाकों में इस टेक्नोलॉजी का प्रयोग न सिर्फ कम लागत और ज्यादा कुशल साबित होगा बल्कि time की भी बचत भी होगी।

दोस्तों विमानन और मोटर गाड़ी जैसे क्षेत्रों में इस टेक्नोलॉजी के प्रयोग से परिवहन क्षेत्र में अधिक क्रांति भी लाई जा सकती है जिससे न सिर्फ उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी बल्कि बनने वाली वस्तु की गुणवत्ता एवं निर्माण के बीच पर्यावरण पर पड़ने वाले अलग प्रभावों में भी कमी आ जाएगी जो देश के एनवायरनमेंट के संदर्भ में विश्व प्रतिबद्धताओं के अनुरूप भी होगा।

3. 3D प्रिंटिंग से संबंधित वैश्विक परिदृश्य

वैश्विक स्तर पर वर्ष 2017 में वैश्विक 3D प्रिंटिंग बाज़ार तकरीबन 7.01 बिलियन डॉलर के स्तर पर पहुँच गया था। औद्योगिक स्तर पर किये जाने वाले 3D प्रिंटिंग के उपयोग की बात करें तो वर्ष 2019 में बाज़ार में इसकी हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत थी।

वर्ष 2018 के दौरान 3D प्रिंटिंग का सर्वाधिक उपयोग हार्डवेयर, उसके पश्चात सॉफ्टवेयर तथा सबसे कम उपयोग सेवा क्षेत्र में किया गया था।

वर्ष 2018 में उत्तरी अमेरिका, 3D प्रिंटिंग (Additive Manufacturing) का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल करने के कारण बाज़ार में अपनी 37 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर रहा।

स्विट्ज़रलैंड के वैज्ञानिकों द्वारा ‘एक सॉफ्ट सिलिकन ह्रदय’ का विकास किया गया जो लगभग मानव ह्रदय के समान ही कार्य करता है। इसके अलावा चीन तथा अमेरिका के वैज्ञानिकों ने संयुक्त प्रयास से 3D प्रिंटिंग तकनीक का प्रयोग करते हुए एम्ब्रियोनिक स्टेम कोशिका का विकास किया, वहीं यूनाइटेड किंगडम के वैज्ञानिकों ने इस तकनीक का प्रयोग करते हुए विश्व के पहले कॉर्निया का निर्माण किया है।

अमेरिकी शोधकर्त्ताओं की एक टीम ने 3D प्रिंटिंग तकनीक के माध्यम से हथेली पर समा जाने वाली एक ‘स्पंज’ जैसी संरचना तैयार की है, जो प्रदूषण को कम करने में कारगर साबित हो सकती है। शोधकर्त्ताओं की एक टीम ने 3D प्रिंटिंग प्रक्रिया के दौरान रासायनिक एजेंट  टाईटेनियम डाईऑक्साइड के नैनो कणों को मिलाकर एक ‘स्पंज’ के समान प्लास्टिक साँचे का निर्माण किया। जिसमें पानी, वायु और कृषि स्रोतों से प्रदूषण को समाप्त करने की क्षमता है।

3. 3D Printer कैसे वर्क करता है

दोस्तों आप इसकी शुरुआत मे एक समान्य घरेलु कंप्युटर पर ही एक 3d object डिज़ाइन करके कर सकते हो , फिर PC को एक 3D Printer से जोड़ देते हैं, और ‘प्रिंट’ बटन दबाते हैं, बस हो गया आपका काम अब आपको सिर्फ 3D Object बनने तक का इंतजार करना होगा और इस प्रक्रिया को पूरा देखना है. इसकी प्रक्रिया ही कुछ ऐसी ही है जैसे कटे पाव के ब्रेड को बनाया जाता है, बस इसको रीवर्स मे समझ सकते हैं आप.

दोस्तों मान लीजिए कि कटे हुए हर एक ब्रेड को अलग-अलग बेक किया जाये और फिर उन सभी को एक साथ जोड़ कर एक पाव बना दिया जाये (जैसा की हर बेकरी वाला इस प्रक्रिया के उल्टा ब्रेड बनाने के time करता है). बस कुछ इसी तरीके से ही सामान्यतः 3d printer भी काम करता है. 

दोस्तों 3d printing की क्रिया पूरी डिज़ाइन object यानी वस्तु को हजारों अलग अलग छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल देती है, फिर इसको नीचे से ऊपर की तरफ , एक टुकड़े से दूसरे टुकड़े को बनाती है. उसके बाद ये छोटी छोटी लेयर्स आपस मे चिपक कर एक कठोर object का निर्माण कर देतीं है. इसकी हर एक लेयर बहुत मजबूत होती है, इसका मतलब ये है कि 3d printer चलने वाली चीजें भी बना सकता है, और जो एक ही वस्तु के टुकड़े जैसे हिंजस, पहिये. आप इस प्रकार एक पूरी गाड़ी प्रिंट कर सकते हैं. हैंडलबार, काठी, फ्रेम, पहिए, ब्रेक, पैडल और चेन बिना किसी भी टूल के मदद लिये इकट्ठे तैयार किये जा सकते है.

4. 3 printing कौनसा मटेरियल इस्तेमाल होता है.

इनमे मुख्यतः 6 प्रकार के मटेरियल का इस्तेमाल होता है.

मेटल

सेरामिक्स

पॉलीमर्स 

कान्क्रीट

मेटल

5. 3D Printing का भविष्य क्या है

दोस्तों जानकारों की माने तो यह additive manufacturing की TDC technological development commerce के प्रकृत्ति को ही बदल देगी क्यूंकि इसमें end users बिना किसी के ऊपर निर्भर हुए ही खुद बहुत कुछ manufacture भी कर सकते हैं. इसके लिए दोस्तों उन्हें अन्य लोगों और corporations से कुछ खरीदने की जरूरत नहीं होगी.

और 3D printers जो अभी capable है output बनाने में colour की और multiple materials में, या आगे भविष्य में भी improve होने वाला है, जिसमें यहाँ तक की functional (electronic) products को भी output में पाया जा सकेगा. 

दोस्तों साथ ही 3D Printing का प्रभाव  waste reduction, energy use,customization, product  medicine, art, availability, construction और sciences में भी पड़ेगा, 3D printing आगे चलकर manufacturing की दुनिया का रुख ही बदल सकती है और ये जरुर होगा.

6. 3D प्रिंटिंग से होने वाले लाभ 

समय की बचत- 3D printing के द्वारा बेहद कम समय में गुणवत्तापूर्ण कार्य भी किया जा सकता है। यह काम की दक्षता में बढ़ोतरी करने में अधिक सक्षम है।

अति कुशल- 3D printing, के द्वारा बनने वाले प्रोटोटाइप का निर्माण बहुत ही आसानी और तेजी के साथ किया जा सकता है।

लचीलापन- 3D printing के लिये अलग अलग प्रकार की सामग्रियाँ उपयोग में लाई जा सकती हैं। इससे अनेकों प्रकार के प्रोटोटाइप और products को प्रिंट करना बेहद आसान हो जाता है।

कम लागत- 3D printing के द्वारा पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक कम लागत पर प्रोडक्ट का निर्माण भी किया जा सकता है। मजबूत और उच्च गुणवत्ता- प्रोडक्ट नमी को अवशोषित ही नहीं करते हैं, जिससे वह लंबे समय तक उपयोग में आते रहते हैं।         

7. 3D प्रिंटिंग से जुड़ी अनेकों चुनौतियाँ

1. दोस्तों इन printers के अंतर्गत object के निर्माण में सबसे अधिक मात्रा में प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है और इसमें बड़े पैमाने पर बिजली की खपत भी होती है जिसे किसी भी तरीके से पर्यावरण के लिहाज़ से बेहतर नहीं कहा जाता है।

2. दोस्तों 3D printing से जुड़ी चुनौतियों की बात करी जाए तो 3D printers में विविधता के कारण objects के बनने में गुणवत्ता की भिन्नता भी आ जाएगी। साथ ही दोस्तों 3D printer में objects की शुद्धता को लेकर एक आदर्श मानक की कमी है। 

3. दोस्तों देश में न सिर्फ लोगों में इस प्रौद्योगिकी के Subject में जागरूकता का भी अभाव है लेकिन इससे संबंधित खोज कार्यों का भी बहुत अभाव है। आयात लागत का ज्यादा होना, employment में कमी तथा 3D प्रिंटर से जुड़ी घरेलू निर्माणकर्ता की सीमित संख्या भी देश में 3D printing की चुनौतियों को जगा रही हैं।

8. 3D Printers महँगा होने के बाद भी क्यों खरीदते हैं 

दोस्तों प्रिंटिंग की जरूरत लोगो को उनके काम की वजह से होता हैं, अगर कोई Technology नई आती है तो ऐसे में लोग उसे ज्यादा पसंद करने लगते हैं। 3D Printer भले ही काफी महंगा है पर इसकी मदद से एक बार  खरीदने के बाद के बाद आप बहुत से काम कर सकते हैं जैसे कि – Mobile का Cover भी प्लास्टिक plastic और रबर से ही बनता हैं जो 3D Printer के ज़रिए ही तैयार किया जाता हैं।

और जिस के हिसाब से बाजार में पैसे मिलते हैं और इसमे सिर्फ एक बार पैसे लगा करके इसकी Help से हमेशा पैसे कमाये जा सकते हैं, और साथ ही दोस्तों इसकी मदद से और भी बहुत तरह के अलग अलग काम भी किए जा सकते हैं printing से जुड़े. 

9. 3D Printers की मर्यादाएं

दोस्तों हालाँकि फ़ैक्टरी खाड़ी करने की तुलना में 3D printer खरीदना बेहद सस्ता है, लेकिन दोस्तों आपके द्वारा बनाए गए प्रति object की लागत ज्यादा होगी. इसलिए दोस्तों 3D प्रिंटिंग का economic अभी तक पारंपरिक बड़े पैमाने पर चीजें नहीं बनाता है. यह कारखानों की मशीनों के स्मूथ फिनिश से बिल्कुल नहीं मिलता है, और न ही उद्योग प्रक्रियाओं की तरह मटेरियल की वेराईटी एवं रेंज की साइज़ दे सकता है. लेकिन, बहुत सी घरेलू टेक्नोलॉजी की तरह, इसकी भी कीमतें कम हो जाएंगी तथा समय के साथ 3d printer क्षमताओं में बदलाव जरूर देखने को मिल सकता है . 

निष्कर्ष 

तो दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमने आपको 3D printer के बारे में बहुत ही रोचक जानकारी से अवगत कराया है अगर आपको ये जानकारी पसंद आयी है तो शेयर जरूर करना और एक comment भी धन्यबाद. 

ये भी पढ़ें :-

Polar bbear से जुड़ी बेहद ही गुप्त जानकारी

Holi से जुड़ा इतिहास और अद्भुत जानकारी

Jio phone से पैसे कैसे कमाएं

Top 7 free ipl 2022 देखने वाले अप्प

Nanotechnology क्या है

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular