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पहली बार 1912 में खोजा गया था ये लिपस्टिक फूल, सदी के बाद फिर खिला ये फूल.

 अरुणाचल प्रदेश में पाया गया लिपस्टिक पौधा 

Lipstick Plant : कुदरत भी एक से बढ़कर एक नमूने हमारी धरती पर उगाती रहती है. हमारी धरती पर जीव जंतुओं की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेगी तो दोस्तों साथ में आपको पौधों की भी बहुत सी ऐसी प्रजातियां आप देख सकते हैं. जो सभी इंसान को हैरानी में डालने पर मजबूर कर देती हैं. अगर पृथ्वी पर दोस्तों ऐसे पेड़ पौधे हैं जिनके फूल को छोड़कर पत्तियां तक महकती रहती हैं और कुछ ऐसे भी पेड़ पौधे होते हैं जिनके फूलों से दुर्गंध आया करती है. और कुछ ऐसे फूल भी हुआ करते हैं जो अपने शेप और साइज से हम सभी को चौंका देते हैं. ऐसे ही दोस्तों फूलों में एक नाम आता है लिपस्टिक वाला लाल फूल जो दोस्तों काफी सुर्खियों में है.

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बोटैनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (Biotechnical survey of India) के तरफ से अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले में यह पेड़ पाया गया है दोस्तों वैसे तो इस पेड़ का नाम या वैज्ञानिक नाम Aeschynanthus monetaria Dunn है पर दोस्तों अगर इससे हम लोग सामान्य भाषा में बताए तो इसे भारतीय लिपस्टिक पौधा भी कह सकते हैं. इसका कारण यह है कि इस पौधे में निकलने वाला फूल बिल्कुल लिपस्टिक के समान हुआ करता है और यह भी कहा जाता है कि पौधा एक सदी के बाद दोबारा अब देखा गया है.

अक्टूबर से जनवरी में निकलते हैं फूल

दोस्तों कृष्ण चौला के द्वारा अरुणाचल प्रदेश में होने वाले फूलों के अध्ययन के दौरान दिसंबर 2021 में अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिला ह्युलियांग और chipru से एस्किनैन्थस के कुछ नमूने इकट्ठा किए गए हैं. यह पेड़ देखने में बिल बिल्कुल हूबहू लिपस्टिक की तरह ही दिखता है. और यह अधिकतर नमी वाले जंगलों में लगभग साढे 500 से 12 सौ मीटर की ऊंचाई पर निकलता है. इसमें फूल आने और इसके फैलने का वक्त जो है. वह अक्टूबर से जनवरी के मध्य हुआ करता है इसको एस्चिन भी कहते हैं. एस्चिन का मायना शर्माना हुआ करता है जबकि दोस्तों एंथोस का मायना फूल होता है.

1912 में करी थी पहली खोज

इस लिपस्टिक वाले पौधे की खोज सबसे पहली बार ब्रिटिश बाटनिस्ट स्टीफन ट्रॉयट डन (Stephen Troyte Dunn) ने 1912 में की थी. और यह खोज अरुणाचल प्रदेश के एक अन्य अंग्रेज वैज्ञानिक इसहाक हेनरी बर्कील के माध्यम से एकत्र किए गए थे. इन्हीं सैंपल के आधार पर होने वाली बीएसआई वैज्ञानिक कृष्णा ने इस खोज के बारे में करंट साइंस जर्नल में एक लेख लिखा था. ट्यूबलर रेड कोरोला की उपस्थिति होने के कारण ही एस्किनैन्थस के तहत कुछ प्रजातियों को लिपस्टिक पौधा भी कह सकते हैं.

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