HomeSamacharगेंहू के बाद चावल हुआ महँगा अब बढ़ेगी खाद्य महंगाई, जानिये बड़ी...

गेंहू के बाद चावल हुआ महँगा अब बढ़ेगी खाद्य महंगाई, जानिये बड़ी वजह.

Breaking News : गेहूं के बाद अब चावल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, इसका अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 6.31 प्रतिशत बढ़कर 37.7 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। इससे आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ने की संभावना है। हालांकि, राहत की बात यह भी है कि केंद्र के पास 396 लाख टन चावल का विशाल भंडार है, जो कीमतों को नियंत्रित करने में काफी मददगार साबित होगा।

Rice price high

बारिश की अनियमितता ने भी बिगाड़ा खेल

धान की बुवाई जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ शुरू होती है। इस बार मानसूनी बारिश नहीं होने के कारण उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना समेत अन्य राज्यों में खेती का रकबा बताया गया है. पिछले सप्ताह तक धान की बुआई 8.25 प्रतिशत कम देखी गई थी।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि इस खरीफ सीजन के 18 अगस्त तक 343.70 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई का रिकॉर्ड है. पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 374.63 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई की गई थी। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि धान के रकबे में कमी आई है।

कारण क्या हैं

विश्लेषकों के मुताबिक चावल की कीमतों में तेजी के कई कारण हैं। दरअसल, धान की फसल की बुवाई में कमी की खबरें लगातार आ रही हैं. ऐसे में चावल की आपूर्ति को लेकर चिंता पैदा हो गई है। कहा जाता है कि इन्हीं चिंताओं के चलते अब गेहूं के बाद चावल के दाम बढ़ रहे हैं.

गेहूं की कीमतों में भी तेजी

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, 22 अगस्त को गेहूं का अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य लगभग 22 प्रतिशत बढ़कर 31.04 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया था। पिछले साल इसी अवधि में गेहूं का भाव 25.41 रुपये प्रति किलो था। गेहूं में तेजी के कारण आटे की औसत खुदरा कीमत भी बढ़ी है। आटे का औसत खुदरा भाव 17 फीसदी बढ़कर 35.17 रुपये प्रति किलो हो गया है। पिछले साल इस अवधि के दौरान यह 30.04 रुपये प्रति किलो था।

कम उत्पादन की संभावना

देश के कुल चावल उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत खरीफ मौसम से आता है। जानकारों का कहना है कि धान की बुआई का रकबा कम होने से धान के उत्पादन में कमी आने की संभावना है. खरीफ सीजन 2022-23 के लिए चावल का उत्पादन 112 मिलियन टन के लक्ष्य से कम रहने की संभावना है।

यह सभी देखें

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular