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Monkeypox : मंकीपॉक्स ने बढ़ायी चिंता, WHO ने किया पूरी दुनिया को अलर्ट, क्या है लक्षण.

Monkeypox के बढ़ते मामले ने बढ़ा दी विश्व की चिंता 

दोस्तों अमेरिका और कई यूरोपीय देशों समेत 14 देशों में मंकीपॉक्स वायरस के 144 मामलों की पुष्टि होने के बाद व डब्ल्यूएचओ ने अलर्ट जारी किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी दी है कि संक्रमण और ज्यादा देशों में फैलने की संभावना है। वहीं, तीन केस मिलने पर बेल्जियम संक्रमितों के लिए 21 दिन का क्वारंटीन अनिवार्य करने वाला पहला देश बन गया है। डॉक्टरों ने यूके के मामलों में ‘महत्वपूर्ण वृद्धि’ की चेतावनी दी है। इसके अलावा इस्राइल और स्वीट्जरलैंड ने भी इस वायरस के उनके देशों में होने की पुष्टि कर दी है।

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दोनों ही देशों में मंकीपॉक्स के एक-एक मामले सामने आ चुके हैं। अधिकारियों ने कहा है कि विदेश से लौटे एक व्यक्ति के मंकीपॉक्स से संक्रमित होने की बात सामने आई है और वे अन्य संदिग्ध मरीजों की तलाश में जुट गए हैं। अस्पताल में भर्ती मरीज की हालत ठीक है। मंत्रालय ने विदेश से लौटने वाले लोगों से बुखार होने और दाने निकलने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क की अपील की है।

दोस्तों मंकीपॉक्स संक्रमण के मामले पहले केवल मध्य और पश्चिमी अफ्रीका से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बीच देखे गए थे, लेकिन अब दूसरे देशों में भी इसके मरीज सामने आए हैं। इनमें से ज्यादातर मरीज युवा हैं और उनके अफ्रीका की यात्रा का कोई इतिहास नहीं है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, मंकीपॉक्स संक्रमण के लिए कोई विशिष्ट उपचार या टीके उपलब्ध नहीं हैं।

क्या है मंकीपॉक्स? 

मंकीपॉक्स के लिए जिम्मेदार वायरस बंदरों और अन्य जंगली जानवरों में पैदा होता है। चूंकि यह पहली बार बंदर में पाया गया था और उसके जरिए इंसान तक पहुंचा है, इसलिए इसका नाम मंकीपॉक्स रखा गया है। 1970 में पहली बार इंसान में यह वायरस मिला था।

लक्षण क्या है? 

ज्यादातर मरीजों में बुखार, शरीर में दर्द, ठंड लगने और थकान के लक्षण देखे गए हैं। गंभीर मामलों में मरीजों के चेहरे, हाथों और शरीर के अन्य हिस्सों पर चकत्ते व दाने भी निकल सकते हैं।

भारत अलर्ट 

कई देशों में मंकीपॉक्स के मामले मिलने के बाद भारत सरकार अलर्ट हो चुकी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंकीपॉक्स को लेकर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और नैशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) को नजर रखने को कहा है। अफ्रीकी देशों से भारत आ रहे यात्रियों पर एयरपोर्ट पर नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर पुणे स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में जांच के लिए भेजे जा सकते हैं। बता दें की मंकीपॉक्स का वायरस फैलने में 5-12 दिन का समय लेता है। 

चिंतित स्वाभाविक : बाइडन

दोस्तों अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि मंकीपॉक्स के मामलों को लेकर ‘चिंतित होने की जरूरत है।’ पहली बार इस बीमारी पर बोलते हुए उन्होंने कहा, ‘चिंता की बात यह है कि अगर यह संक्रमण फैला तो इसके परिणाम भुगतने होंगे। अभी मुझे संक्रमण के प्रसार के बारे में नहीं बताया गया है लेकिन इसके बारे में हर किसी को चिंतित होना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि यह पता लगाने के लिए काम चल रहा है कि कौन-सा टीका प्रभावी हो सकता है। मंकीपॉक्स के मामले अफ्रीका के बाहर विरले ही देखने को मिलते हैं। कम से कम दो मामले अमेरिका में सामने आए हैं।

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