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Share market tips | IPO क्या होता है | Initial Public Offering क्या होता है.

IPO ( Initial Public Offering) क्या होता है

दोस्तों शेयर बाजार अनिश्चितताओं से भरा बाजार है. बाजार की चाल एक पल में कुछ और होती है तो दूसरे ही पल स्टॉक मार्केट का अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. आप भी अक्सर स्टॉक मार्केट में इनवेस्टिंग के बारे में जरूर सोचते होंगे, लेकिन फिर आपको लगता होगा कि आख़िर कैसे शेयर बाजार में इनवेस्ट किया जाए?

Initial Public Offering. ( share market tips)

दरअसल शेयर बाजार में इनवेस्टिंग की कोई ज्यादा मुश्किल प्रक्रिया नहीं है. बस आपको थोड़ा पढ़ना होगा और शेयर बाजार पर नज़र रखने की आदत ड़ालनी होगी. स्टॉक मार्केट में इनवेस्टिंग दो तरीकों से की जा सकती है. SHARE MARKET TIPS

1. प्राइमरी मार्केट (PRIMARY MARKET)

2. सेकंड्ररी मार्केट (SECONDRY MARKET)

प्राइमरी मार्केट में आप आईपीओ (IPO) के जरिए इनवेस्ट (INVESTING) करते हैं और सेकंड्री मार्केट में सीधे तौर पर स्टॉक मार्केट में लिस्टिड शेयर में इनवेस्टिंग की जाती है. तो आज के इस आर्टिकल में हम आपको IPO यानी कि Initial Public Offering के बारे में बताएँगे तो समझने के लिये पूरा जरूर पढियेगा.

1.IPO है क्या जानिये? Share market tips.

IPO का फुल फॉर्म है- Initial Public Offering (IPO), जब एक कंपनी अपने समान्य स्टॉक या शेयर को पहली बार जनता के लिए जारी करता है तो उसे आईपीओ, इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग (सार्वजनिक प्रस्ताव) कहते हैं। लिमिटेड कंपनियों द्वारा ये आईपीओ इसलिए जारी किया जाता है जिससे वह शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो सके। शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद कंपनी के शेयरों की खरीद शेयर बाजार में हो सकेगी।

आईपीओ में जब एक कंपनी अपने सामान्य स्टॉक (common stock) या शेयर पहली बार जनता (Normal Public) के लिए जारी करती है तो उसे IPO (Initial Public Offering) कहा जाता है।

IPO ज्यादातर छोटी, नई कंपनियों द्बारा जारी किए जाते हैं जो अपने व्यापार को बढाने के लिए पूँजी (capital) चाहती हैं, पर यह बड़ी निजी-स्वामित्व वाली कंपनियों (privately-owned companies) द्बारा भी जारी किए जा सकते हैं जो सार्वजनिक बाज़ार में कारोबार करना चाहती हैं (publicly traded) वो करती हैं। share market tips

2. कितने दिनों के लिये IPO खुलता है?

आईपीओ के जरिए कोई भी कंपनी 5 या फिर 7 शेयर नहीं देती. इसमें लॉट ऑफर किए जाते हैं. ( share market knowledge) कंपनी की ओर से ऑफर किए गए लॉट में 1 से लेकर कितने भी शेयर हो सकते हैं. लेकिन इस दौरान कंपनी द्वारा बताया जाता है कि, प्रति व्यक्ति कितने लॉट बुक कर सकता है. साथ ही इसकी एक तय कीमत भी होती है. आईपीओ लाने की जानकारी कंपनी को ही लोगों को देनी पड़ती है. इसके तहत कंपनी बताती है कि किस दिन से शेयर खरीदने के लिए बुकिंग होगी. दरअसल आईपीओ 3 से 5 या फिर 7 दिनों के लिए खुलता है. और इसके बाद बुकिंग बंद कर दी जाती है. यानि की आप इसके बाद किसी भी कंपनी के शेयर बुक नहीं कर सकते हैं.

3.IPO को लाने का कारण क्या है?

जब किसी कंपनी को अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता होती है तो वह आईपीओ जारी करती है। ये आईपीओ कंपनी उस वक्त भी जारी कर सकती है जब उसके पास धन की कमी हो वह बाजार से कर्ज लेने के बजाय आईपीओ से पैसा जुटाना ज्यादा बेहतर समझती है।

यह किसी भी कंपनी की विस्तार योजना होती है। ( share market tips) शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद कंपनी अपने शेयरों को अन्य योजनाओं में लगा सकती है।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानि SEBI (Securities and Exchange Board of India) आईपीओ लाने वाली कंपनियो के लिए एक सरकारी रेग्युलेटरी है। यह आईपीओ लाने वाली कंपनियो से नियमों का सख्ती से पालन करवाती है। कंपनी हर तरह की जानकारी सेबी को देने के लिए बाध्य होती हैं। आईपीओ के माध्यम से जुटाई गई धनराशि सामान्य रूप से कंपनी के विस्तार, उसके तकनीकी विकास, नई संपत्ति खरीदने हेतु, कर्जे समाप्त करने हेतु, इत्यादि के लिए उपयोग में लाई जाती है।

4. रकम जमा करने का उद्देश्य.

इस बात पर ध्यान जरूर दिया जाना चाहिए कि कंपनी द्वारा जुटाए गए फंड का इस्तेमाल कहां किया जाना है. अगर कंपनी कर्ज के बोझ से दबी है और डीआरएचपी में उल्लेख करती है कि आय का इस्तेमाल मौजूदा कर्ज का भुगतान करने के लिए किया जाएगा, तो निवेशकों को इसमें निवेश करने में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए. हालांकि, अगर फंड का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के साथ-साथ कंपनी की तरक्की के मिश्रित उद्देश्य के लिए किया जाना है, तो निवेश करने पर विचार किया जा सकता है. अगर कंपनी पहले ही अच्छा परफॉर्म कर रही है और आईपीओ से प्राप्त फंड का इस्तेमाल कंपनी की तरक्की के लिए करना चाहती है तो ऐसे में इसमें निवेश करना फायदे का सौदा साबित हो सकता है.( share market tips) 

5. IPO के बारे में कुछ जरुरी बातें।

  • IPO एक निजी निगम के शेयरों को नए स्टॉक जारी करने में जनता को देने की प्रक्रिया को संदर्भित करता है।
  • कंपनियों को आरंभिक सार्वजनिक पेशकश रखने के लिए एक्सचेंजों और एसईसी द्वारा आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए।
  • कंपनियां निवेश बैंकों को बाजार में नियुक्त करती हैं, मांग की मांग करती हैं, आईपीओ की कीमत और तारीख तय करती हैं, और बहुत कुछ।( share market tips) 
  • एक आईपीओ को कंपनी के संस्थापक और शुरुआती निवेशकों के लिए बाहर निकलने की रणनीति के रूप में देखा जा सकता है, जो उनके निजी निवेश से पूर्ण लाभ का एहसास करता है।
  • कंपनी जो अपने शेयर प्रदान करती है, जिसे ‘जारीकर्ता’ के रूप में जाना जाता है, वह निवेश बैंकों की मदद से करता है। आईपीओ के बाद, कंपनी के शेयर एक खुले बाजार में कारोबार करते हैं। उन शेयरों को द्वितीयक बाजार व्यापार के माध्यम से निवेशकों द्वारा आगे बेचा जा सकता है. ( share market tips) 

6. जितना फायदा उतना रिस्क भी 

आईपीओ कंपनी के मालिकों और शुरुआती निवेशकों को बिक्री के प्रस्ताव के जरिए बाहर निकलने का ऑप्‍शन भी देती है. साथ ही उन्हें नए व्यवसाय में शुरुआती जोखिम लेने के लिए कंपनसेट भी किया जाता है. दरअसल जो कंपनियां शेयर स्टॉक मार्केट में लिस्टेड होती है. वह आईपीओ के जरिए ही आती है. ऐसे में जब भी आईपीओ लिस्ट होता है तो इस बात की संभावनाएं भी बढ़ जाती है कि, शेयर वैल्यू डबल हो जाएगी.( share market tips) जबकि पहले से ही लिस्टिड शेयर को दो गुना करने में काफी मेहनत लगती है. लेकिन जितना यहां फायदा है उतना रिस्क भी है. क्योंकि जरूरी नहीं है हर बार IPO डबल हो. कई बार इसके कम रहने की उम्मीद भी होती है.

7.निश्कर्ष

तो दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमने आपको IPO यानी कि Initial Public Offering के बारे में बताया है अगर आपको पसंद आया है तो शेयर जरूर करना और comment भी धन्यवाद ( share market tips)

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