HomeBeauty & Healthतंत्र मंत्र के चक्कर में बढ़ रहा सिजोफ्रेनिया, कैसे करें बचाव.

तंत्र मंत्र के चक्कर में बढ़ रहा सिजोफ्रेनिया, कैसे करें बचाव.

सिजोफ्रेनिया क्या है

कोई मेरा पीछा कर रहा है। लोग मुझे मारना चाहते हैं। ऐसे तमाम वहम अक्सर लोगों को दिलो-दिमाग में बैठ जाते हैं। इसकी चपेट में आने वाले तंत्र-मंत्र के चक्कर में पड़ जाते हैं। सही इलाज के अभाव में तबीयत बिगड़ती जाती है और हालत गंभीर होने पर डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। दरअसल यह दिक्कत स्किजोफ्रेनिया नामक दिमागी बीमारी के कारण होती है। केजीएमयू के मनोरोग विभाग में हुए एक शोध पता चला है कि स्किजोफ्रेनिया के 70 फीसदी मरीज काफी समय तक तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक के चक्कर में पड़े रहते हैं। हालत गंभीर होने के बाद डॉक्टर के पास पहुंचते हैं।

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मनोरोग विभाग के डॉ. आदर्श त्रिपाठी के अनुसार तीन साल तक ओपीडी में आने वाले स्किजोफ्रेनिया के मरीजों पर शोध किया। इसमें हर मरीज से पूछने पर पता चला कि 70 फीसदी डॉक्टर को दिखाने से पहले तंत्र-मंत्र के चक्कर में पड़ चुके थे। डॉ. आदर्श के अनुसार शुरुआत में दिखाने से बीमारी पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। इससे मरीज स एक बार फिर सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है। हालांकि इधर-उधर भटकने से समय खराब होने के साथ ही बीमारी एडवांस हो जाती है। इससे इलाज भी जटिल हो जाता है।

स्ट्रेस नहीं बायोलॉजिकल डिसऑर्डर

लोग अक्सर समझते हैं कि यह बीमारी तनाव के कारण होती है। हालांकि ऐसा नहीं है, यह एक बायोलॉजिकल डिसऑर्डर है। डॉ. आदर्श के अनुसार पारिवारिक जीन व न्यूरो कैमिकल के काम करने के तरीके पर यह बीमारी निर्भर है। इस बीमारी की संभावना वालों में स्ट्रेस से दिक्कत बढ़ सकती है, हालांकि स्ट्रेस लेने वाले सभी लोगों को यह बीमारी नहीं हो सकती। विश्व के एक फीसदी मानसिक रोगियों में यह बीमारी पाई जाती है।

मित्रों ऐसे होती है शुरुआत  

केजीएमयू के मनोरोग विभाग के हेड डॉ. विवेक अग्रवाल ने बताया कि 18 से 25 आयु वर्ग में यह बीमारी ज्यादा होती है। शुरुआत में मरीज उल्टी-सीधी बातें करते हैं। इसके साथ ही नींद ना आ और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण होते हैं। समय से इलाज नहीं मिलने पर बीमारी अडवांस स्टेज में पहुंच जाती है। इसमें मरीज को भ्रम या काल्पनिक चीजें सच लगने लगती है। लगता है कि जैसे कोई पीछा कर रहा है या कोई मारना चाहता है। इसके साथ ही किसी तरह की आवाज सुनाई देना या कोई दिखना बीमारी की अडवांस स्टेज हैं। शुरुआत में दवा व थेरेपी से मरीज सामान्य हो सकता है। हालांकि इलाज लंबा चलता है। वर्तमान में हर ओपीडी में इस बीमारी के दस से पंद्रह मरीज आ रहे हैं।

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