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Ashwagandha – अश्वगंधा की खेती बना रही है अमीर, आप भी जानिये कैसे?

अश्वगंधा की खेती से होने वाले फ़ायदे – कैसे करें खेती 

 अश्वगंधा Ashwagandha एक औषधिय फसल है. इसकी बाजार में हमेशा मांग रहती है. यह एक झाड़ीनुमा पौधा होता है. अश्वगंधा की छाल, बीज और फल से कई तरह की दवाएं बनती हैं.

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Ashwaganda

दोस्तों बदलती हुई दुनिया में खेती का रूप भी बदलने लग गया है. आज खेती सिर्फ दो समय की रोटी का जरिया ही नहीं रह गई है, बल्कि अब खेत में कामयाबी की फसल तैयार की जा रहीं है. ऐसे तमाम गाँव के लोग और नौजवान हैं जो बड़ी बड़ी नौकरी छोड़कर खेती करने जा रहे हैं और एक नौकरी पेशा से कहीं ज्यादा कमाई भी कर रहे हैं.

दोस्तों आज हम आप लोगों को एक ऐसी ही खेती के बारे में बताऊँगा जिसका हर हिस्सा बेहद महँगा और कीमती होता है. दोस्तों हम यहाँ बात कर रहे हैं अश्वगंधा की farming के बारे में. मित्रों अश्वगंधा की खेती चार गुना तक फायदा देने वाली खेती मानी जाती है. अश्वगंधा Ashwagandha की खेती करने से farmer कम समय में ज्यादा पैसा कमा कर अमीर भी बन सकता हैं. हमारे भारत देश में अश्वगंधा की खेती हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, केरल, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और जम्मू कश्मीर में की जाती है. दोस्तों इसकी खेती खारे पानी में भी असानी से हो सकती है.

अश्वगंधा Ashwagandha की पौध कैसे बनाई जाती है 

मित्रों अगस्त और सितंबर बारिश के ठीक बाद खेत की जुताई होनी चाहिये. दो से तीन बार कल्टीवेटर से जुताई करके खेत में पाटा लगा दीजिए . नर्सरी से पानी निकासी का इंतजाम भी अच्छा होना जरूरी है. अगर आप गोबर की खाद का प्रयोग करेंगे तो बीजों का अंकुरण ठीक होता है. नर्सरी के लिए पर हेक्टेयर 5 – 6 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है.

अश्वगंधा Ashwagandha खेती के लिये मिट्टी और मौसम 

दोस्तों अश्वगंधा Ashwagandha की खेती गर्मियों के मौसम में वर्षा शुरू होने पर लगायी जाती है. दोस्तों बेहतर फसल के लिए जमीन में हल्की नमी और मौसम थोड़ा शुष्क होना जरूरी है. रबी के मौसम में अगर वर्षा हो जाती है तो फसल में अच्छा बदलाव आ जाता है. इस के अच्छे विकास के लिए 22-37 डिग्री तापमान और 510 से 760 एमएम वर्षा अधिक जरूरी मानी जाती है.

बिमारी से बचाव और सिंचाई का तरीका 

दोस्तों अगर साधारण वर्षा हो रही है तो अश्वगंधा की सिंचाई की जरूरत बिल्कुल नहीं होती है. अगर जरूरत पड़ती है तो सिंचाई की भी जा सकती है. खेत से खरपतवार निकलते रहना बहुत जरूरी माना जाता. अश्वगंधा Ashwagandha एक जड़ वाली फसल होती है इसलिए निराई-गुडाई करने से फसल अधिक अच्छी होती है.

पैदावार और कमाई कितनी 

दोस्तों अश्वगंधा Ashwagandha की खेती बोआई के 160 से 170 दिन में तैयार हो सकती है. पत्तियाँ सूखने लगें तो समझ जाइए  कि फसल तैयार हो गई है. पौधे को उखाडक़र जड़ों के गुच्छे को दो सेमी ऊपर से काट दिया जाता है और इन्हें सुखा लिया जाता है फलों को तोड़कर उसके बीज निकाल लिए जाते हैं .

किसान भाइयों और दोस्तों एक हेक्टेयर खेत से 6-7 क्विंटल ताजा जड़ प्राप्त हो जाती हैं जो सूखने पर 2.5 से 4.5 क्विंटल ही रह जाती हैं. और इससे 50-60 किलो बीज भी निकालता  है. एक हेक्टेयर में इस फ़सल पर एक अनुमानित खर्चा 10,000 रुपए तक आ जाता है जबकि करीब 5 क्विंटल जड़ों तथा बीज की बिक्री से लगभग 75000 रुपए तक जो जाति हैं. यानी एक हेक्टेयर जमीन से 6 से 7 महीने में 60,000 रुपये से ज्यादा की कमाई हो जाती है. इस तरह आप 5 हेक्टेयर खेत से 3 लाख रुपये से अधिक की आमदनी कर सकते हो.

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फ़रवरी से अप्रेल तक होती है कटाई 

मित्रों बुआई के बाद अश्वगंधा Ashwagandha की कटाई फ़रवरी से लेकर अप्रेल तक चलती रहती है. इस को उखाड़ा जाता है और ऊपर के पौधों को जड़ से बिल्कुल अलग कर दिया जाता है. और जड़ के टूकड़े करके इसे सूखाया जाता है. फल में से बीज और सूखी हुई पत्तियों को अलग कर दिया जाता है. इसके भी तमाम इस्तेमाल होते हैं. आम तौर पर अश्वगंधा की 650 से 850 किलोग्राम जड़ और 60 किलोग्राम बीज पर हेक्टेयर प्राप्त किया जा सकता हैं. आप अश्वगंधा को मंडी में ले जाकर या दवा बनाने वाली कंपनियों को सीधे भी बेच सकते हो.

बिहार में हो रही अच्छी-खासी खेती और पैदावार 

दोस्तों बिहार राज्य में भी अब इसकी खेती बहुत हो रही है. ये पहले बेगूसराय जिले में प्रयोग के तौर पर इसकी खेती की जाती थी, जो पूर्ण सफल भी रही. और अब राज्य के वैज्ञानिक इसे बिहार के अनेक हिस्सों, जैसे कि उत्तर बिहार, सीवान और सारण में भी इस खेती को करवाने की योजना में हैं. दोस्तों केंद्र सरकार की जलवायु अनुकूल खेती आधार पर औषधीय पौधा अश्वगंधा को बिहार में प्रोत्साहन के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.

निष्कर्ष

तो मित्रों आज के इस छोटे से आर्टिकल में हमने आपको अश्वगंधा Ashwagandha की खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी बतायी जैसे कि खेती कैसे कब और की जा सकती है क्या जरूरतें हैं और कैसे इसकी बिकवाली होती है अगर आपको ये आर्टिकल पसंद आया है तो शेयर जरूर करना और एक comment भी धन्यबाद…

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