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Amazing Facts : बंगाल का हावड़ा ब्रिज जिस पर जापान की सेना ने बम की बारिश की थी, जानिये इसका इतिहास.

Hawda Bridge History : पश्चिम बंगाल का हावड़ा ब्रिज, जिसे अंग्रेजों ने बनाया था, लेकिन इस पुल से भारतीयों का रिश्ता है। इस ब्रिज को बनाने में भारत की टाटा कंपनी भी शामिल थी। पुल ऐसे समय बनकर तैयार हुआ था कि आज तक इसका औपचारिक उद्घाटन भी नहीं हुआ है। साल 1936 में इस ब्रिज को बनाने का काम शुरू हुआ था। जबकि 3 फरवरी 1943 को यानी दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इस ब्रिज को जनता के लिए खोल दिया गया था। जापान ने विश्व युद्ध के दौरान भी इस पुल पर हमला किया था। दो पैरों पर खड़ा यह पुल कई मायनों में खास है।

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टाटा कंपनी ने लोहे की आपूर्ति की थी

इस ब्रिज को बनाने का ठेका ब्रेथवेट, बर्न एंड जोसेप कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया था। इस ब्रिज में 85 प्रतिशत स्टील की आपूर्ति टाटा स्टील करती थी। आपको बता दें कि इस ब्रिज को बनाने में कुल 26 हजार 500 टन स्टील का इस्तेमाल किया गया था। हुगली नदी पर बना यह पुल कोलकाता और हावड़ा को जोड़ता है। ब्रिटिश 1874

पुल तोड़ने के लिए जापान की सेना ने की बमबारी

इस पुल पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान ने हमला किया था। दरअसल, जापानी सेना पुल तोड़कर आवाजाही को रोकना चाहती थी। जापानी सेना ने उस पर भारी बमबारी की। पुल इतना मजबूत था कि पुल को कोई नुकसान नहीं हुआ।

1500 फीट का पुल सिर्फ दो पैरों पर टिका है

इस ब्रिज को इस तरह से बनाया गया है कि यह पूरा ब्रिज सिर्फ दो पैरों पर टिका है। करीब आधा किलोमीटर लंबे इस पुल की ऊंचाई 280 फीट है। जब इस पुल का निर्माण किया गया था, यह तीसरा सबसे लंबा पुल था। इस ब्रिज की खास बात यह है कि इसके निर्माण में कहीं भी नट-बोल्ट का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसे बनाने में धातु की कीलों यानि रिवेट्स का इस्तेमाल किया गया है.

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