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रामायण और भगवान राम से जुड़े 10 अनोखे फैक्ट | Amazing Fact About Ramayna.

रामायण Ramayna और भगवान राम से जुड़ी 10 अद्भुत बातें

दोस्तों रामायण के बारे में तो हम सभी ने बहुत कुछ पढ़ा और सुना भी हैं | पर फिर भी दोस्तों बहुत सी बातें ऐसी हैं जो हम अभी तक नहीं जानते हैं | तो दोस्तों आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से कुछ ऐसी ही अनसुनी बातों से आपको अवगत कराने वाले हैं जिनको आप नहीं जानते हैं |

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रामायण फैक्ट

1. दोस्तों रामायण महाकाव्य में 24000 छंद है जो 7 अध्याय और खंड में बंटे हुए है। और दोस्तों अगर रामायण के हर 1000 छंद का पहला अक्षर लिया जाये तो जो 24 अक्षर हमे मिलते हैं उनको मिलाकर ही गायत्री मन्त्र बनता हैं।

2. दोस्तों ब्रम्हा जी ने रावण को सबसे पहले ही बता दिया था कि दशरथ और कौशल्या का पुत्र रावण की मृत्यु का कारण बनेगा | और अपनी मृत्यु को टालने के लिए रावण ने कौशल्या का अपहरण कर के उसे एक बक्से में बंद करके उन्हें एक सुमुद्र के बीच द्वीप पर छोड़ आया था |

3. दोस्तों माना जाता हैं कि देवी सीता भगवान शिव जी के धनुष को बचपन से खेल- खेल में उठा लिया करती थी | इसीलिए सीता के स्वयंवर में धनुष जिसका नाम पिनाका था, उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखी गयी थी |

4. अपने एक विजय अभियान के दौरान रावण जब स्वर्ग पहुंचता है तो वहां उसे रम्भा नामक एक अप्सरा मिलती है | रावण उस पर मोहित हो जाता है | दोस्तों रावण ने जब उसे छूने का प्रयास किया तो अप्सरा ने कहा कि मैं आपके भाई कुबेर के पुत्र नल कुबेर के लिए आरक्षित हूं | इसलिए में आपकी एक पुत्र वधु के समान हूँ | पर दोस्तों कहते हैं कि रावण अपनी शक्ति में इतना चूर था कि उसने अप्सरा की एक भी न मानी| और जब नल कुबेर को इस बात का पता चला तो उसने रावण को भयंकर श्राप दिया कि अगर आज के बाद यदि किसी पराई स्त्री को उसकी इच्छा के बिना हाथ लगाया तो उसके सिर के 100 टुकड़े हो जायेंगे|

5. दोस्तों भगवान राम एक ऐतिहासिक महापुरुष थे और इसके बहुत से प्रमाण भी हैं। शोधानुसार पता चलता है कि भगवान राम का जन्म 5114 ईस्वी पूर्व हुआ था। चैत्र मास में नवमी को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है। और जन्म का समय राम की वंशपरंपरा से भी सिद्ध होता है। दोस्तों अयोध्या के इतिहास और अयोध्या की वंशावली से भी यह सिद्ध होता है।

6. दोस्तों वनवासी और आदिवासियों के पूज्जनीय प्रभु श्रीराम- भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास भी हुए था। उनमें से 12 वर्ष राम ने जंगल में रहकर ही काटे थे । 12वें वर्ष की अंत के दौरान सीता का हरण हो गया तो बाद के 2 वर्ष उन्होंने सीता को ढूंढने, वानर सेना का गठन करने और रावण से युद्ध करने में गुजारे। दोस्तों 14 वर्ष के दौरान उन्होंने बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य किए जिसके चलते आज भी हमारे देश और देश के बाहर राम संस्कृति और धर्म को देखा जा सकता है।

7. दोस्तों जाने-माने इतिहासकार और पुरातत्वशास्त्री अनुसंधानकर्ता डॉ. राम अवतार जी ने श्रीराम और सीता के जीवन की घटनाओं से जुड़े ऐसे 200 से भी ज्यादा स्थानों का पता लगाया है, जहां आज भी स्मारक स्थल विद्यमान हैं, जहां श्रीराम और सीता रुके या रहे थे। वहां के स्मारकों, भित्तिचित्रों, गुफाओं आदि स्थानों के समय-काल की जांच-पड़ताल वैज्ञानिक तरीकों से कई गई है । इन स्थानों के नाम है- सरयू और तमसा नदी के पास के स्थान, प्रयागराज श्रृंगवेरपुर तीर्थ, सिंगरौर में गंगा पार कुरई गांव, दंडकारण्य के कई स्थान, पंचवटी नासिक, प्रायागराज, चित्रकूट (मप्र), सतना (मप्र), , सर्वतीर्थ, पर्णशाला, तुंगभद्रा, शबरी आश्रम, ऋष्यमूक पर्वत, कोडीकरई, रामेश्‍वरम, धनुषकोडी, रामसेतु और नुवारा एलिया पर्वत श्रृंखला।

8. दोस्तों श्रीराम की दो बहनें भी थी एक शांता और दूसरी कुकबी। हम दोस्तों यहां आपको शांता के बारे में कुछ बताएंगे। हमारे साउथ इंडिया की रामायण के अनुसार श्रीराम की बहन का नाम शांता था, जो अपने चारों भाइयों से बड़ी थीं। शांता राजा दशरथ और कौशल्या की पुत्री थीं, लेकिन पैदा होने के कुछ सालों बाद कुछ कारणों से दशरथ ने शांता को अंगदेश के राजा रोमपद को दे दिया । और भगवान श्रीराम की बड़ी बहन का पालन-पोषण राजा रोमपद और उनकी पत्नी वर्षिणी ने किया था , जो रानी कौशल्या की बहन और श्रीराम की मौसी थीं।

9. दोस्तों बाल्मीकि रामायण के अनुसार एक बार रावण अपने विमान से कहीं जा रहा था| उसने एक सुन्दर युवती को तप करते हुए देखा | वह युवती वेदवती थी जो कि भगवान विष्णु को पति के रूप में पाने के लिए अपनी तपस्या कर रही थी | रावण उस पर मोहित हो चला और उसे जबरदस्ती अपने साथ ले जाने का प्रयास करने लगा | तब उस युवती ने रावण को भयानक श्राप दिया कि तेरी मृत्यु का कारण एक स्त्री ही बनेगी और अपने प्राण भी त्याग दिए |

10. दोस्तों मानते हैं कि गिलहरी के शरीर पर जो धारियां है वो भगवान राम के आशीर्वाद के कारण हैं | जिस समय दोस्तों लंका पर आक्रमण करने के लिए रामसेतु का निर्माण हुआ था उस समय एक गिलहरी इस काम में मदद कर रहीं थी | उसके इस समर्पण को देख कर श्री राम ने अपनी अंगुलियाँ उसकी पीठ पर फ़ेर दी थी | तब से उसके शरीर पर धारियां पड़ गई थी|

तो दोस्तों अगर आपको ये पोस्ट पसंद आयी है तो शेयर जरूर करना और एक प्यारा सा कमेन्ट करना. धन्यबाद

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