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बकरीद Eid ul adha क्यों मनाई जाती है || Eid-ul-adha के बारे में अद्भुत जानकारी.

Eid-ul-Adha के बारे में बेहद रोचक जानकारी

 हमने यहाँ पर इस्लाम धर्म के सबसे बड़े त्योहार में एक ईद-उल-अज़हा (eid ul adha ) के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य प्रकाशित किया है. यह त्यौहार भारत पाकिस्तान, बांग्लादेश, सऊदी अरब, दुबई, अफगानिस्तान और विश्व के बहुत से मुस्लिम देशो में धूमधाम से मनाया जाता है. चलिए जानते है muslim धर्म के त्यौहार ईद-उल-अज़हा के बारे में कुछ रोचक और ज्ञानवर्धक बाते और कुछ महत्वपूर्ण तथ्य.

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बकरीद Eid ul adha के बारे में जानकारी.

  1. ईद उल अजहा (Eid-ul-adha) का त्यौहार 2 मैसेज देता है “एक परिवार के बड़े सदस्य को स्वार्थ के परे देखना चाहिए और व्यक्ति को खुद को मानव उत्थान के लिए लगाना चाहिए.
  2. ईद उल अजहा के दिन जानवर की कुर्बानी देना एक प्रकार की प्रतीकात्मक कुर्बानी माना जाता है. 
  3. ईद उल अजहा eid ul adha का अर्थ “त्याग वाली ईद” भी होता है.
  4. इस्लाम धर्म के कुरान में कहा गया है की “हमने तुम्हें हौज़-ए-कौसर दिया तो तुम अल्लाह के लिए नमाज़ पढ़ो और कुर्बानी करो”
  5. हिजरी के आखिरी महीने जिल हिज्ज में पूरी दुनिया के मुसलमान मक्का सऊदी अरब में इकट्ठा होकर हज मनाते है और ईद उल अजहा (Eid-ul-adha) का त्यौहार भी इसी दिन मनाया जाता है. 
  6. “बकरीद” शब्द का अर्थ में बकरों से कोई संबंध नहीं है. “बकरीद” शब्द में, अरबी में ‘बक़र’ का अर्थ होता है, बड़ा जानवर जो जि़बह किया (काटा) गया.
  7. भारत पाकिस्तान व बांग्लादेश अरब अफगानिस्तान दुबई कुवैत में ईद-उल-अज़हा को “बकरा ईद” कहते है. और ईद-ए-कुर्बां का मतलब होता है – बलिदान की भावना
  8. इस्लामिक मान्यता के अनुसार सबसे महान्‌ वंशजों में से एक हज़रत इब्राहिम अपने पुत्र को अल्लाह के हुक्म पर खुदा कि राह में कुर्बान करने जा रहे थे. और खुदा ने उनके पुत्र को जीवनदान दिया था. उनकी याद में ईद-उल-अज़हा त्यौहार मनाया जाता है.
  9. ईद-उल-अज़हा (ईद उल ज़ुहा) जिसे क़ुरबानी की ईद भी कहते है यह त्यौहार इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों प्रमुख त्यौहार होता है. 
  10. इस्लाम धर्म का ईद-उल-अज़हा त्यौहार रमजान के पवित्र महीने के खत्म होने लगभग 70 दिन के बाद मनाया जाता है.
  11. क़ुर्बानी का महत्व होता है की ईश्वर या अल्लाह से बहुत लगाव और प्रेम का इज़हार करना.
  12. बलिदान और समर्पण की भावना से समाज में एकता व भाईचारा बढ़ता है और समाज प्रगति करता है.
  13. कहते है की एक अच्छे समाज के निर्माण में बलिदान और समर्पण की भावना का विशेष योगदान होता है.
  14. कहा जाता है कुर्बानी के बाद गोश्त (meat) को तीन हिस्सों में बाटना चाहिए ” एक अपने लिए, दूसरा पड़ोसियों के लिए और तीसरा ग़रीबों व यतीमों के लिए रखना चाहिए.
  15. ईद-उल-अज़हा पर क़ुर्बानी का एक उद्देश्य ग़रीबों को भी अपनी ख़ुशियों में भागीदार बनाना होता है.
  16. मुसलमानों के लिए अपनी जिंदगी में एक बार हज करना जरूरी होता है और हज होने की खुशी में ईद-उल-जुहा का त्योहार मनाया जाता है.
  17. इस्लाम धर्म में बलिदान का बहुत बड़ा महत्व है और ईद-उल-अज़हा को बलिदान का त्योहार भी कहते है.
  18. दोस्तों क़ुरबानी के बकरे की कीमत लाख बड़ी क्यों न हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता अल्लाह को मतलब है क़ुरबानी के जज्बे से जो इंसान दुसरे इंसान का भला करता है अल्लाह सबसे ज्यादा उससे प्यार करता.
  19. अगर दोस्तों कोई इंसान कुरआन के नियम अनुसार अपनी इनकम का 2.5 % दान देता है और सामाजिक कार्यों में धन कुर्बान करता है तो कोई जरूरी नहीं की वो बकरे की क़ुरबानी दे.
तो दोस्तों उम्मीद है कि आपको Eid-ul-adha के बारे में ये अद्भुत जानकारी बेहद पसंद आयी होगी अगर आपको पसंद आयी है तो share और comment जरूर करना धन्यवाद. 
 

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